Header Image

 शाही संबोधनों पर हाईकोर्ट की चेतावनी 

 महलों को अस्पतालों में बदलने की गूँज   

आजादी से पहले किसी रियासत के दीवान रहे जरमनीदास की किताब-महाराजा-खासी चर्चित रही है.इसमें राजे महाराजाओं की सनकभरी हुकूमत और दौलत लुटाने के खौफनाक सच्चे किस्से हैं.आजादी के बाद भी उनके शाही ठाठबाट और खुमारी में कमी नहीं आई है.इसमें पुरखों द्वारा छोड़ी गई दौलत के अलावा बतौर प्रिवीपर्स मिलने वाली मोटी रकम/विशेषाधिकारों का बड़ा हाथ था.साल-67 के चुनाव में बहुतेरे पूर्व रजवाड़ों ने कांग्रेस का विरोध किया जिसमे जयपुर की गायत्री देवी और ग्वालियर की विजयाराजे सिंधिया प्रमुख थीं.तब इंदिरा गाँधी ने प्रिवी पर्स और वाहनों में शाही नंबर प्लेट जैसे विशेषाधिकारों का खत्म कर दिया था.अब केन्द्रीय मंत्री और उनके पौत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया का अपने पुत्र के साथ शाही पोशाक और उसी अंदाज में पीछे खड़े दरबान का फोटो मीडिया मे वायरल हुआ है.

जयपुर हाईकोर्ट में जस्टिस गोयल ने याचिका में महाराजा और प्रिंस शाही संबोधनों का इस्तेमाल पर सख्त लहजे में सवाल कर उनके वकील को चेतावनी दी की इन संबोधनों को हटा संशोधित याचिका पेश करें,वरना याचिका स्वत: ख़ारिज मानी जाएगी.जयपुर हाईकोर्ट पहले भी शाही संबोधनों के लिए केंद्र और राज्य सरकार से जवाबतलब कर चुका है.जोधपुर पीठ भी इन संबोधनों पर चिंता व्यक्त कर चुकी है.मध्यप्रदेश में शिवराज मुख्यमंत्री थे तब मंत्री यशोधरा राजे के दबाव में सर्कुलर जारी करवाया की यशोधरा राजे के नाम से पहले श्रीमंत संबोधन लगाया जाए.बाद में जगहंसाई होने पर इसे वापस लेना पड़ा था.इन परिवारों में जमीन जायदाद को लेकर झगड़े और कोर्टबाजी भी होती है.ग्वालियर में ज्योतिरादित्य और उनकी तीन बुआओ के बीच हाईकोर्ट में डेढ़ दशक से मामला चल रहा है.नवाब पटौदी,जो भोपाल रियासत के भी वारिस थे,के एक्टर बेटे सैफ का परिजनो से विवाद चल रहा है.

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

रिपब्लिक चैनल के अर्णव गोस्वामी जब चैनल टाइम्स नाउ में थे तब वसुंधरा राजे और उनके बेटे दुष्यंत के धौलपुर महल के बारे मे बड़ा खुलासा किया था की यह सरकार की संपत्ति है.तब दोनों ने खुद सामने न आकर भाजपा नेताओं को लीपापोती मे लगा दिया था.अर्णव गोस्वामी ने तब तूफानी कार्यक्रम मे घोषणा की थी की आज से वो पूर्व राजे-महाराजों के बड़े-बड़े राजमहलों को वंशजों से छीन वहाँ अस्पताल और स्कूल खोलने का अभियान शुरू कर रहे हैं.लगता है टाइम्स नाउ के बाद खुद का चैनल शुरू करने,उसे स्थापित करने की जद्दोजहद में उन्होंने उस क्रांतिकारी घोषणा को बिसरा दिया.! अब सरकार को राजे-रजवाड़ों के वंशजों को आलीशान राजमहलों से बेदखल कर जायदाद का बड़ा हिस्सा राजसात कर लेना चाहिए.आखिर यह दौलत पुरखों ने कमाई तो जनता का शोषण कर ही है.

-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

मध्यप्रदेश की राजनीति में पूर्व रजवाड़ों का खासा दखल रहा है.कोई पाँच दशक बाद सारे सिंधिया एक ही पार्टी याने भाजपा मे हैं,सो उनके रुतबे मे इजाफा होना ही है.केंद्र मे मंत्री ज्योतिरादित्य को भोपाल मे बंगला मिलना और शाही अंदाज मे पुनर्निर्माण के बाद गृहप्रवेश घोर आपत्तिजनक है.यह उनकी पुश्तैनी जायदाद तो है नहीं जिसे महलनुमा प्रवेशद्वार से सज्जित किया जाता.भाजपा नेता पूर्व मंत्री जयभान पवैया सिंधियाओं को लेकर पहले आक्रामक हुआ करते थे.एक समारोह में उन्होंने नाम पट्टिका में सिंधिया के नाम से पहले श्रीमंत लिखा देखा तो अफसरों को हड़काया की गुलाम हो गए हो क्या,और श्रीमंत के संबोधन को तुरंत हटाने को कहा था.

मुख्यमंत्री रहते शिवराज ने  सिंधिया घराने को अंगरेजपरस्ती के लिए कोसा पर बुआओं का खास ख्याल रखा था.लोकसभा चुनाव से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया का घमंडिया तेवरों वाला वीडियो वायरल हुआ था जिसमे वो सार्वजनिक कार्यक्रम मे गुना कलेक्टर को अहंकारी भाषा मे ऐसे अभद्र लहजे मे आदेश दे रहे थे जिसका इस्तेमाल आज कोई चपरासी के लिए भी नहीं करता होगा.लताड़े जा रहे कलेक्टर इकबालसिंह बैंस के पुत्र अमनवीर थे जो तीन साल बैतूल मे कलेक्टरी करने के बाद चंद रोज पहले गुना मे पदस्थ हुए थे.लगता यही है की शिवराज के विश्वस्त के बेटे की गुना मे तैनाती सिंधिया पचा नहीं पा रहे थे,जहां से उन्हे चुनाव लड़ना था.तभी जलील करने के बाद उन्हे गुना से हटवा दिया था.


मध्यप्रदेश की प्राथमिकता में अंबानी के

वंतारा जैसे चिड़ियाघर का निर्माण क्यों?

खबर छोटी छपी है पर इसके निहितार्थ बड़े हैं.मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गृह नगर उज्जैन में जूलाजिकल पार्क के निर्माण का निर्णय किया है.इसकी डीपीआर बनाने का काम वन विभाग के बजाए अंबानी के वंतारा पार्क का संचालन करने वाली संस्था को दिया है.करीब 80 एकड़ में आकार लेने वाले पार्क पर 300 करोड़ खर्च का अनुमान है.वन विभाग ने 25 करोड़ मंजूर भी कर दिए हैं.मुकेश अंबानी ने गुजरात के जामनगर में तीन हजार एकड़ में फैला चिड़ियाघर(सेवालय) छोटे बेटे अनंत के लिए बनाया है जिनकी पिछले साल शाही शादी की देश दुनिया में खासी चर्चा रही थी.प्रधानमंत्री मोदी ने वंतारा का उद्घाटन कर वहां सात घंटे बिताए थे.मोदी द्वारा उद्घाटन और मुकेश अंबानी द्वारा निर्मित,तिस पर पर गुजरात में आबाद वंतारा पर भाजपा मुख्यमंत्रियों की नजर तो पड़नी ही थी.

इसमें बाजी मार ले गए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव.उन्होंने तुरंत जामनगर पहुँच कर वंतारा के दर्शनों के बाद आनन फानन में मध्यप्रदेश में भी वैसा ही जू और वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर बनवाने का संकेत करने में देर नहीं की थी.निर्भीक पत्रकारिता के लिए विख्यात न्यूज़ पोर्टल न्यूज़ लांड्री के मुताबिक कानूनन जिन पशुओं और जीव जंतुओं को जंगल में होना चाहिए और जिन्हें छूना भी अपराध है वो सब वंतारा में कैद हैं.इनमे ब्राजील के लुप्त 26 मकाऊ पक्षी भी हैं जिन्हें जर्मनी की विवादास्पद फार्म से लाया गया है.पूरी दुनिया में मकाऊ पक्षियों की तादाद 200 या उससे कम है.न्यूज़ लांड्री के मुताबिक 2018 तक के कानून ने वन्य प्राणियों की लुप्त प्रजातियों का मालिकाना हक़ निजी हाथों में जाने से रोका है जिसे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगातार कमजोर किया जा रहा है.                     ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ वंतारा के लिए जानवरों की अवैध खरीद,उनके साथ दुर्व्यवहार,वित्तीय अनियमितता और मनी लांड्रिंग के आरोपों को लेकर कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं थी.तब सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र जांच को जरूरी मानते हुए वंतारा के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर जांच के लिए सुप्रीमकोर्ट के रिटायर्ड जज जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की.इसमें हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस,पूर्व पुलिस कमिश्नर और रेवेन्यु सर्विस के पूर्व अफसर शामिल थे.भले इसने वंतारा को क्लीनचिट दे दी पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा ना कर एसआईटी गठन के दो दिन बाद ही प्रदेश मे  वंतारा जैसे सेंटर के लिए अंबानी की संस्था से समझौता कर लिया.!        

----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को कम से कम सुप्रीमकोर्ट की जांच के निष्कर्ष की प्रतीक्षा करनी थी.पर जहाँ मोदीजी,अंबानी और गुजरात का मेल हो वहां और कुछ मायने रखता है भला.! गुजरात जैसे अपेक्षाकृत संपन्न राज्य में सरकार नहीं,देश के सबसे अमीर ने यह केंद्र बनाया है.मध्यप्रदेश में जहाँ पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए महिलाओं और बच्चों को मीलों पैदल खटना पड़ता हो,सरकारी स्कूल और अस्पताल बिना मास्टरों और डाक्टरों के घिसट रहे हों वहां सरकार की प्राथमिकताओं में.पानी की पूर्ति और स्कूल/अस्पतालों का कायाकल्प होना चाहिए ना की जूलाजिकल पार्क सेंटर का निर्माण.टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में करीब एक दर्जन टाइगर रिजर्व के अलावा घड़ियाल के दो अभ्यारण्य भी मुरैना और सीधी में हैं.

देश में चीता अरसे पहले विलुप्त हो चुका है.इसे फिर देश में आबाद करने के लिए मध्यप्रदेश के कूनो पालपुर में विदेश से चीते लाकर बसाने का प्रयोग प्रारंभ किया गया है.यह बात और है की कूनो पालपुर सेंचुरी का निर्माण शेरों याने लायन के दूसरे घर के लिए किया गया था.कारण यह की शेर अभी सिर्फ गुजरात में गिर में ही पाए जाते हैं.इनके चीता की तरह विलुप्त होने की रिपोर्ट आने पर केंद्र सरकार ने पूरे देश में सर्वे के बाद कूनो की आबोहवा को शेरों के लिए मुफीद पाया .तब्दो दर्जन गाँव उजाड़ कर कूनो सेंचुरी का निर्माण कराया गया था.जब गिर से कुछ शेर लाने का समय आया तब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मना कर दिया था.इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने पर उसने दो दो बार कुछ शेर देने का आदेश दिया.इसे भी मोदी ने नहीं माना था.