मध्यप्रदेश में शाही हुकूमतों की याद दिला रहीं केबिनेट की राजधानी से बाहर बैठकें
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राजधानियां होती ही इसलिए हैं जहाँ से सरकारें संचालित होती हैं.इसलिए
विधानसभाएँ,मंत्रालय और मंतरी संतरी आदि वहीँ होते हैं और मंत्रिमंडल की बैठकें भी
वहीँ होती हैं.यह इस गरीब मध्यप्रदेश की बदनसीबी है की यहाँ कभी दो राजधानियां हुआ
करती थीं.!भोपाल के अलावा पचमढ़ी राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती
थी.गर्मियों का मौसम आते ही राज्यपाल, मुख्यमंत्री,मंतरी/संतरी और उनका फ़ौज फाटा सरकारी वाहनों में लद
पचमढ़ी पहुंच जाता था.यहाँ राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नामजद बंगलों के अलावा
मंत्रियों के बंगले भी हुआ करते थे.विशाल राजभवन अब भी वहां मौजूद है,पर सेहत के चलते कई राज्यपाल तो वहां पहुँचे ही
नहीं.वैसे तब भोपाल का मौसम भी गर्मियों में सुहावना होता था और जेठ की गर्मियां
आसानी से झेली जा सकती थीं.
गर्मियों में राजधानी के पचमढ़ी शिफ्ट होने का सिलसिला साल-६८ में बंद हो गया जब यहाँ संविद की सरकार थी जिसमे तत्कालीन जनसंघ भी भागीदार था.अब भाजपा बन चुकी है और राज्य में अरसे से सत्तारूढ़ पार्टी है.यहाँ कके पर्ची वाले मुख्यमंत्री मोहन यादव दीगर शहरों मे शाही अंदाज मे मंत्रिमंडल की बैठकें आयोजित कर रहे हैं जिन्हें शाही ठाठबाट के चलते मीडिया द्वारा दरबार कहा जाता है. इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट भाजपा द्वारा अतीत के राजघरानों को लुभाने पर केन्द्रित है.इसके मध्यप्रदेश ब्यूरो के राहुल नरोन्हा की अन्य संवाददाताओं के सहयोग से लिखी-राजघरानों की वापसी-शीर्षक रिपोर्ट का आगाज इंदौर मे मोहन यादव मंत्रिमंडल की शाही बैठक के ब्यौरे और बड़ी तस्वीर के साथ होता है. ------------------------------------------------------------------------------------------------------
इंदौर के राजवाड़ा और दमोह के सिंग्रामपुर में मंत्रिमंडल की राजसी अंदाज की बैठकों के बाद हिल स्टेशन पचमढ़ी में बैठक हुई.सिंग्रामपुर बैठक वीरांगना दुर्गावती की 500 वीं जयंती को समर्पित थी तो इंदौर के की बैठक अहिल्या बाई की स्मृति में थी.हिल स्टेशन पच्मादी की बैठक पर हवाखोरी के सैर सपाटा की तोहमत ना लग जाए सो इतिहास से सतपुड़ा के सपूत भभूतसिंह को निकाल बैठक उन्हे समर्पित कर दी गई.दाद देना पड़ेगी मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस रुझान की.प्रदेश में 20--25 साल से भाजपा की सरकार है पर पहले कोई मुख्यमंत्री भभूत सिंह और उनके पराक्रम को सामने नहीं ला पाया था.!भभूतसिंह के महिमामंडन से भला किसे ऐतराज होगा पर उनकी याद इस बैठक के अवसर पर ही क्यों आई.? ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
राजधानी से बाहर मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल की चौथी बैठक
भोपाल के नजदीक जगदीशपुर में,जिसे पहले इस्लाम नगर कहा जाता था,पूरे तामझाम से हुई.खबरों के मुताबिक़ जगदीशपुर बैठक
के लिए सड़कों,महलों और दीगर व्यस्वस्थाओं
पर तेरह करोड़ खर्च कर डाले गए.पर मीडिया का कहना है की इस इलाके की असली पहचान
वास्तुकला का बेजोड़ नमूना गोंड महल अब भी खंडहर हालत में है.अलबत्ता इस बैठक की
तस्वीरें भव्यता और बंदोबस्त के तामझाम का नजारा पेश करती हैं.लगता है वीरांगना
दुर्गावती,अहिल्याबाई और भभूतसिंह के
जैसे जगदीशपुर का कोई नायक/नायिका नहीं खोजा जा सका तो यहाँ की बैठक समानता और
न्याय को समर्पित रही.
मुख्यमंत्री का कोई भी इवेंट बिना विशाल विज्ञापनों के पूरा नहीं होता.तभी
प्रदेश भर के अख़बारों में मोदी/मोहन की तस्वीरों वाला पूरा पेज विज्ञापन हर बैठक
के अवसर पर छपता है.इसलिए इस बार भी पूरे पेज का विज्ञापन प्रदेशभर के मीडिया में
मौजूद रहा. इस विज्ञापनबाजी और फ़ौज फाटे
आदि के खर्च को जोड़ लें तो अब तक के चार तमाशे करोड़ों का जनधन लुटाने वाले साबित होंगे.दूरदराज
के ऐसे तमाशे सरकारी अमले के लिए पिकनिक ज्यादा साबित होते हैं.