एक कुँवारा पिता,जिससे
आप मोहब्बत करेंगे
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पुणे के 28 बरस के
सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य तिवारी ने डाउन सिंड्रोम पीड़ित शिशु को
गोद लेने के लिए जमीन आसमान एक कर दिया,जिसके दिल मे छेद भी है.!उन्होने
राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री आदि को पत्र लिखे,मेल किए और केंद्र मे महिलाओं/बच्चों
का विभाग संभाल रहीं मेनका गांधी तक जा पहुंचे.आदित्य के जज्बे के आगे सरकार पिघली
और गोद लेने के नियम सरल कर दिए.इंदौर मे मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी में बिन्नी को पहली बार
देखते ही आदित्य ने गोद लेने का फैसला कर लिया.उसकी बीमारी का पता चलने पर भी फैसला
नहीं बदला बल्कि इरादा और पुख्ता हो गया.
जब आदित्य ने बिन्नी
को गोद लेने की मंशा से मिशनरीज़ को अवगत कराया तो उसे पालने मे होने वाली अनेक दिक्कतों
और नियम कानून का हवाला देकर आदित्य को समझाने की कोशिश की गई पर वह अटल रहा.इस बीच
बिन्नी को भोपाल शिफ्ट कर दिया गया.इस बीच दैनिक भास्कर ने उसकी अनूठी चाहत पर खबर
छापी जिसने जादुई असर किया.मेनकाजी ने आदित्य से फोन पर बात की और भोपाल आने पर बिन्नी को देखने मातृछाया भी गई.
इसके बाद आदित्य की राह आसान
होती चली गई.केन्द्र के दत्तक अभिकरण ने बच्चा गोद लेने वाले सिंगल पेरेंट की न्यूनतम
उम्र 25 से लेकर 55 साल करते हुए आदित्य को भोपाल
बुलाया.वे दोस्तों के साथ भोपाल आए जहां बिन्नी को उनकी गोद मे दे दिया गया.आदित्य
ने उसे नाम दिया है-अवनीश.अब आदित्य नौकरी के साथ अवनीश की देखभाल मे भी रम गए हैं.शिशुरोग
विशेषज्ञ की देखरेख मे उसका उपचार भी करा रहे हैं.(इंडियन एक्सप्रेस की खबर)
