पचमढ़ी में क्यों है साल भर वीरान रहने वाला राजभवन.?
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एमपी में एक नहीं दो-दो राजभवन हैं.राजधानी भोपाल मे पच्चीस तीस एकड़ मे फैला राजसी ठाट वाला मुख्य राजभवन तो दूसरा पचमढ़ी मे,जो कभी गर्मियों मे सूबे की राजधानी हुआ करती थी.साल-67 के बाद राजधानी शिफ्ट होना बंद होने से मुख्यमंत्री-मंत्रियों के बंगले होटलों और गेस्ट हाउसों मे तब्दील हो गए पर 22.84 एकड़ मे फैला विशाल राजभवन जस का तस है.सवाल है की इस राजभवन को किसी जनउपयोगी ऑफिस या होटल आदि में क्यों नहीं बदला गया.अब यह बदलाव तुरंत होना चाहिए.राज्यपाल का प्रेस अधिकारी रहते वहाँ जाने पर श्मशान जैसी शांति का एहसास हुआ.वहां के सरकारी अमले के वेतन भत्तों पर हर साल करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च हो जाते होंगे.इसके अलावा भवन के रखरखाव पर भी मोटी रकम हर साल खर्च होती है.तिस पर राज्यपाल बनने वाले सभी बुजुर्ग कार्यकाल में एक दो बार ही तशरीफ़ लाते रहे हैं.अलबत्ता रिश्तेदार और गृह राज्य के नजदीकी जरूर मेहमानी का लुत्फ़ उठाते हैं. अब एक ही राजभवन पर्याप्त है क्योंकि शपथ तो अब मैदानों में भी होने लगी है..![दैनिक भास्कर खबर/भोपाल,पचमढ़ी,देहरादून और नैनीताल के फोटो ]
