जस्टिस गंगेले के खिलाफ महिला जज के आरोप गलत निकले
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज एस.के.गंगेले के खिलाफ तत्कालीन महिला जज
द्वारा की गई यौन उत्पीड़न की शिकायत को राज्यसभा की जांच कमेटी ने सही नहीं माना है.अलबत्ता
कमेटी ने महिला जज के तब किए गए असमय तबादले को गलत माना है.यह वाकया साल-१५ के शुरुआत
का है जब जस्टिस गंगेले हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ में पदस्थ थे और महिला जज वहीँ एडीजे
थीं. बाद में ग्वालियर से सीधी तबादला होने पर उक्त महिला जज ने नौकरी से इस्तीफ़ा दे
दिया था.
इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब राज्यसभा के ५८ सदस्यों ने जस्टिस गंगेले के खिलाफ महाभियोग का नोटिस तब के राज्यसभा सभापति डा. हामिद अंसारी को सौंपा था. महाभियोग की पहल करने वाले शरद यादव के अलावा नोटिस पर माकपा के सीताराम येचुरी, कांग्रेस के दिग्विजयसिंह, सपा के रामगोपाल यादव और जया बच्चन, बसपा के सतीश मिश्र, टीएमसी के डेरेक-ओ-ब्रिएन, अनु आगा,एचके दुआ और केटीएस तुलसी के भी हस्ताक्षर थे. इस पर डॉ अंसारी ने तीन सदस्यों की जांच कमेटी गठित की जिसमे सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर भानुमती और जस्टिस मंजुला चेल्लुर के अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल को शामिल किया गया था. कमेटी की रिपोर्ट शुक्रवार को राज्यसभा के पटल पर रखी गई.
