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जिसने प्रताड़ित किया उनको हाईकोर्ट जज

बनाने पर महिला जज ने दे दिया इस्तीफ़ा

यह सात आठ साल पहले की ऐसी घटना की पुनरावृत्ति है.अंतर यह है की तब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज एस.के.गंगेले के खिलाफ एडीजे स्तर की महिला जज ने यौन उत्पीड़न शिकायत के बाद सेवा से इस्तीफा दे दिया था.अब शहडोल में पदस्थ महिला जज अदिति शर्मा ने सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ जज राजेश गुप्ता को हाईकोर्ट में पदस्थ किए जाने के विरोध में इस्तीफ़ा दिया है जिन पर उन्होंने प्रताड़ना/कदाचार के आरोप लगाए थे.अदिति शर्मा उन छह महिला जजों में भी शामिल थीं जिनकी सेवाऐं हाईकोर्ट ने समाप्त कर दी थीं.

दरअसल हाईकोर्ट की फुलकोर्ट की अनुशंसा पर मध्यप्रदेश विधि विभाग ने कार्य संतोषजनक ना पाए जाने के आधार पर 2017 और 2018 में नियुक्त छह महिला जजों की सेवाएँ समाप्त कर दी थीं.तब सुप्रीम कोर्ट द्वारा खुद संज्ञान लेने पर हाईकोर्ट ने ज्योति वरकड़े,सोनाक्षी जोशी,प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी की सेवाएँ तो बहाल कर दीं पर अदिति शर्मा और सरिता चौधरी के बारे में निर्णय नहीं बदला.इसको अदिति शर्मा ने बेदाग़ रिकार्ड के आधार पर सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती दी.

अपने आवेदन में उन्होंने प्रसव अवकाश संबंधी तकलीफों और भाई के कैंसर का जिक्र कर इसे अन्याय बताया.सुप्रीम कोर्ट ने महिला जज की प्रसव संबंधी (गर्भपात) तकलीफों की अनदेखी को गलत माना.जस्टिस नागरत्ना और कोटिश्वर सिंह की पीठ ने उन्हें बहाल करते हुए टिप्पणी की कि महिलाओं की प्रसव और गर्भपात संबंधी तकलीफों का पुरुषों को तभी एहसास होता जब वो खुद इनसे गुजरते.पीठ ने बर्खास्तगी के नियमों पर हाईकोर्ट से स्पष्टीकरण भी माँगा था.

हाईकोर्ट जज एसके गंगेले के खिलाफ एडीजे महिला जज के यौन उत्पीड़न की शिकायत और इस्तीफे के मामले मे सुप्रीम कोर्ट की उच्चस्तरीय कमेटी और बाद में राज्यसभा की सुप्रीम कोर्ट जजों और वरिष्ठ वकीलों वाली जांच कमेटी ने भी उत्पीड़न की शिकायत को सही नहीं पाया पर महिला जज के सीधी तबादले को गलत बताया था.सालों बाद जब पूर्व जज ने सेवा मे वापसी के लिए सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दायर की तब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने विरोध किया.इसे ना मान सुप्रीम कोर्ट ने उनको बहाल कर दिया.(नईदुनिया/दैनिक भास्कर/टाइम्स ऑफ़ इंडिया/इंडियन एक्सप्रेस की खबरें)