मंत्री ने सती प्रथा की समाप्ति के लिए तो नहीं कोसा.?
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पुश्री इंदरसिंह परमार
मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री हैं.उन्होंने एक समारोह में सती प्रथा ख़त्म
कराने वाले आजादी पूर्व के समाज सुधारक राजा राम मोहन राय को अँगरेजों का दलाल
कहने की धृष्टता और दुस्साहस कर डाला.यह समारोह आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा
मुंडा की जयंती पर आयोजित था.यहाँ मंत्री,वह भी शिक्षा विभाग के द्वारा समाज सुधारक राजा राम
मोहन राय का फूहड़ता से जिक्र करना घोर आपत्तिजनक था.लगता तो नहीं पर आशंका तो होती है की
कहीं यह हमला सती प्रथा को खतम करने के लिए तो नहीं किया गया था.?
यहाँ राजस्थान में आजादी के बहुत बाद रूपकुंवर के सती होने का उल्लेख जरूरी है जिसकी घोर निंदा होने के साथ एक तबके ने महिमामंडन भी किया था.अब खबर आई है की इस कथन पर हंगामा होने और दबाव बढ़ने पर मंत्री ने माफी मांगी है.जैसा ऐसे मामलों में हमेशा होता है,उन्होंने भी माफ़ीनामे में गलती से जबान फिसलने से गलत शब्द निकल जाने की बात कही है.पर बिरसा मुंडा के आयोजन में बिना प्रसंग राजा राममोहन राय का उल्लेख और फिर माफी से उनका दोष कम नहीं होता.ना इससे यह मामला शांत ही होगा.प्रतिपक्ष ने तो इसे लपक ही लिया है.
