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मालिक को बचाने टाइगर से भिड़े श्वान ने दी जान

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स्वर्गीय नीरज के गीत की पंक्ति है-क्या है करिश्मा,कैसा खिलवाड़ है,जानवर आदमी से ज्यादा वफादार है.यह गीत राजकपूर की फिल्म के लिए लिखा गया था.जानवरों मे भी श्वान याने कुत्ते को ही स्वामिभक्ति और चौकस नींद के लिए पाला जाता है.ऐसी ही दुस्साहसी स्वामिभक्ति दिखा मध्यप्रदेश के विख्यात टाइगर रिजर्व बांधवगढ़ में एक जर्मन शेपर्ड श्वान ने मालिक की टाइगर के हमले से रक्षा करते हुए अपनी जान दे दी.पत्रिका मे और टाइम्स ऑफ़ इंडिया,भोपाल में प्रकाशित वरिष्ठ रिपोर्टर पी नवीन की यह खबर खूब वायरल हो रही है. देश के इस विख्यात टाइगर रिजर्व में 170 के आसपास टाइगर हैं.

स्वर्गीय नीरज के गीत की पंक्ति है-क्या है करिश्मा,कैसा खिलवाड़ है,जानवर आदमी से ज्यादा वफादार है.यह गीत राजकपूर की फिल्म के लिए लिखा गया था.जानवरों मे भी श्वान याने कुत्ते को ही स्वामिभक्ति और चौकस नींद के लिए पाला जाता है.ऐसी ही दुस्साहसी स्वामिभक्ति दिखा मध्यप्रदेश के विख्यात टाइगर रिजर्व बांधवगढ़ में एक जर्मन शेपर्ड श्वान ने मालिक की टाइगर के हमले से रक्षा करते हुए अपनी जान दे दी.पत्रिका मे और टाइम्स ऑफ़ इंडिया,भोपाल में प्रकाशित वरिष्ठ रिपोर्टर पी नवीन की यह खबर खूब वायरल हो रही है. देश के इस विख्यात टाइगर रिजर्व में 170 के आसपास टाइगर हैं.


इस इलाके के भरहुत गाँव के निवासी किसान शिवम बड़गैंया दस साल पहले इस जर्मन शेपर्ड डॉग को,जो तब पिल्ला था,घर लाए और उसे बहादुर बेंठो नाम दिया.तब से वो सुबह से लेकर शाम तक जहाँ भी जाते बहादुर साथ होता और रात में उनके साथ खेत की रखवाली भी करता था.कुत्ते अपनी चौकसी वाली श्वान निद्रा के लिए भी जाने जाते हैं.तीन चार दिन पहले जब शिवम खेत में बहादुर के साथ थे तभी सुबह तड़के एक बाघ प्रकट हुआ.इससे शिवम घबराए पर बहादुर टाइगर पर टूट पड़ा और उसके कई हिस्सों को घायल भी कर दिया.


पर श्वान से दस गुना वजनी टाइगर जल्द ही संभल गया और उसने बहादुर की गर्दन पर अपने पैने दांतों और पंजों से हमला कर दिया.पर बहादुर ने हार नहीं मानी और उसे भगा कर ही दम लिया.तब शिवम घायल बहादुर को बांहों में लेकर 25 किमी दूर जिला मुख्यालय उमरिया में वेटेनरी डाक्टर के पास भागे.वेटेनरी डाक्टर अखिलेश सिंह याद करते हैं की शिवम सुबह पांच बजे घायल श्वान के साथ उनके दरवाजे गिड़गिड़ाते आए की उसे बचा लीजिए,उसने मेरी जान बचाई है.मैंने पूरी कोशिश की पर बाघ के नाख़ूनों ने उसकी गर्दन मे गहरे घाव कर दिए थे.इसलिए कुछ घंटों बाद ही उसकी मौत हो गई.