सामंती संबोधनों पर हाईकोर्ट की लताड़
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केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके पुत्र का शाही पोशाक और
उसी अंदाज में दरबान का फोटो खूब छपता रहता है.अब जयपुर हाईकोर्ट में जस्टिस
महेंद्र कुमार गोयल ने इस शाही ठसक पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व घराने की याचिका
ख़ारिज करने की चेतावनी दी है.दरअसल इसमे याचकों के लिए महाराजा और प्रिंस शाही
संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है.जस्टिस गोयल ने दशकों पहले खतम शाही
विशेषाधिकारों का जिक्र करते हुए सख्त लहजे में सवाल किया की लोकतंत्र में इन शाही
संबोधनों का क्या मतलब है.? उन्होंने याचकों के वकील को
चेतावनी दी की इन संबोधनों को हटा संशोधित याचिका पेश करें,वरना मुक़दमा खारिज कर दिया जाएगा.उन्होंने 13 अक्टूबर को निर्णायक सुनवाई तय कर यह भी कहा की ऐसा
ना होने पर याचिका स्वत: ख़ारिज मानी जाएगी.
यह याचिका 2001 में जयपुर घराने के वारिसों
ने नगर निगम द्वारा हाउस टेक्स की वसूली को चुनौती देता हुए दायर की है.यह पहला
मौक़ा नहीं है जब बड़ी अदालत ने शाही संबोधनों पर ऐतराज जताया है.जयपुर हाईकोर्ट
जनवरी,2022 में भी इससे सम्बंधित केस मे
शाही संबोधनों के लिए केंद्र और राज्य सरकार से जवाबतलब कर चुका है.इससे पहले
हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ भी ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान शाही सम्बोधनों पर
चिंता व्यक्त कर चुकी है.
